Saturday, October 23, 2010

एक मच्छर की मनोदशा


राजधानी दिल्ली सहित पूरे देश में मच्छरराज व्याप्त
है। कुछ तो इनके प्रकोप और कुछ इनके आतंक की
परीकथाओं से बच्चे-बच्चे की जुबान पर इन मच्छरों
का नाम चढ़ चुका है। डेंगू, चिकनगुनिया सहित कई
अज्ञात बीमारियों को बढ़ावा देने वाले मच्छरों को बैठे-
बिठाए आजकल सेलेब्रिटी का तमगा मिल चुका है। इस
पदवी के लिए न तो इन्हें किसी रियलिटी शो का हिस्सा
बनना पड़ा और न ही लाइमलाइट में आने के लिए
कोई ऊंटपटांग हरकत ही करनी पड़ी। नतीजतन आज कई
नामी गिरामी शख्सियतें इनके रसूख से रश्क करने लगी
हैं। नाना प्रकार की मीडिया के चलते चहुंओर इनका गुणगान
सहज ही देखा जा सकता है। इनकी पब्लिसिटी का
आलम यह है कि आजकल सबलोग अपने आसपास
इनकी मौजूगदी को सुनिश्चित कर लेना चाहते हैं।
अपने खड़े, बैठे या लेटे समय चाहे कोई वस्तु दिखे या
न दिखे लेकिन मच्छरों के मौजूदगी की आश्वस्ति के
उपरांत उपक्रम को अंजाम देना लोगों की दिनचर्या का
अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।
हे श्रेष्ठ मानव, लिहाजा मैने भी आसन ग्रहण करने के
साथ ही अपने आसपास चौकन्नी निगाह डाली। मेरी
तीक्ष्ण नजरों की जद में एक मच्छर आ ही गया।
लहराते श्रृंगों और ललचाई नजरों से मेरी तरफ देख रहा
था। हालांकि तबतक मैं अति सक्रियता की स्थिति में
आ चुका था लिहाजा मेरे ऊपर आक्रमण का उसे मौका
नहीं मिल सका। उसने घेरा और कसा किया लेकिन
मेरी वक्र दृष्टि से उसे यह आभास हो चुका था कि यहां
उसकी दाल नहीं गलने वाली। फलस्वरूप हमले की रणनीति
के परिणामों की मन ही मन गणना करते हुए अपना
अंतिम असफल प्रयास को अंजाम दिया। उसके डैनों
से ज्यादा तेज गति से कुर्सी पर बैठे बैठे मेरे घूर्णन से
वह मच्छर थोड़ा अचंभित हुआ और बिना सांस लिए
एक साथ मेरी तीन चार परिक्रमा करने के बाद शून्य
में ओझल हो गया। मैं जड़वत कुर्सी पर विराजमान रहा।
अब तक मैं सोचने की मुद्रा में आ चुका था।
शून्य में ताकते हुए हुए मैने सोचना शुरू किया। अगर
यह आर्थोपोडा संघ का जीव आज मुझे डस लेता तो
कई बातें होतीं। मैं किसी रोग से संक्रमित हो सकता था
लेकिन मच्छर को क्या होता। मान लीजिए रक्तपान की
दुस्साहसिक कोशिश के दौरान वह बेचारा शहीद भी हो
सकता था। अच्छा चलो अगर खून चूसने के काम में
कोई मच्छर सफल भी होता होगा तो क्या सोचता होगा?
खून का स्वाद कैसा है? उसके स्वादानुसार रहा तो ठीक
अगर किसी धन्य पुरुष के कसैले खून का पान किया तो
बुरा सा मुंह बनाते हुए अमुक व्यक्ति को ब्लैक लिस्टेड
कर देता होगा। हो सकता है मुंह का जायका खराब हो जाने पर
अपनी संस्कृति की सीमा रेखा को लांघ भी सकता है।
बेचारा मच्छर…….। उई………… मेरी तो चीख निकल गई।
दरअसल एक सेलेब्रिटी मच्छर ने अभी अभी बेदर्दी से
मेरा रक्तपान करके मेरी तंद्रा भंग कर दी है।

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