देवलोक में भी खटमलों का प्रकोप गर्मियां शुरू होने को हैं । मच्छरों एवं खटमलों के सक्रिय होने का समय आ रहा है । पूर्व में आए तमाम सर्वेछणों में बताया गया है कि तनाव या फलाने चीज के कारण नींद नहीं आ रही है लोगों को । एक तो करेला उस पर नीम चढा । अब ये आथ्रोपोडा संघ के राछस जीना हराम कर देंगे । टीवी पर एक से एक कीटनाशकों का प्रचार आता है लेकिन ये कीटनाशक इनके लिए टानिक का काम कर रहे हैं । इनकी प्रतिरछा प्रणाली कीटनाशक चाट चाट कर इतनी सुदृढ़ हो गयी है कि अब कीटनाशक इनके लिए इत्र हो गये हैं । इत्र लगाकर ये अपने काम को ज्यादा प्रभावी ढंग से अंजाम दे रहे हैं ।अब क्या किया जाय क्या तोड़ हो सकता है इन राछसों का । कैसे नींद पूरी करें । बगैर नींद पूरी किए हर छेत्र में आपका प्रदर्शन गड़बड़ा जाएगा । इस तरह से देश की पूरी वर्कफोर्स ही ढह जाएगी । आईटी और बीपीओ जिसके दम पर भारत महाशक्ति बनने का दंभ भरता है,इनके कर्मचारियों का तो रात भर जागरण और दिनभर आ-मरण हो जाएगा । खैर मैं बड़ा चिंतित हुआ । गहन सोच में डूब गया । सोचा कि यार ये अपने देवता लोग तो चारपाई पर सोते ही नहीं हैं । इस संदर्भ में कभी पढ़ा हुआ एक श्लोक याद आयाश्लोक कुछ इस प्रकार था
कमले कमला शेते, हरः शेते हिमालयः ।
छीराब्धौ च विष्णु शेते,मन्ये मत्कुढ़ शंकया ।।
देवियों और सज्जनों भावार्थ यह है कि कमल के पुष्प पर लछ्मी जी निवास करती है । देवादिदेव महादेव भगवान शिव जैसे देवता भी हिमालय पर्वत पर स्थान बनाए हुए है । वहीं तीनों लोकों के मालिक विष्णु भगवान छीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर नींद का परमसुख भोगते है । क्या कारण है ये लोग चारपाई का उपयोग नहीं करते है कहीं इसके पीछे खटमलों का भय तो नहीं है?
किसी ने ठीक कहा है कि न सोने जैसा सुख,न रोने जैसा दुख । इस भवसागर रूपी पृथ्वी पर भी सबसे बड़ा सुख अच्छी नींद लेना है । जैसा कि आपने देखा कि देवलोक में भी इस सबसे बड़े सुख को अर्जित करने के लिए हमारे धुरंधर देवता भी चारपाई का प्रयोग नहीं कर रहे हैं ।इसलिए हे प्राणी हमें भी इस सुख को हासिल करने के लिए कुछ विकल्पों पर सोचना होगा ।
Monday, February 25, 2008
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