
आज वैलेंटाइन्स डे है । जागरूक युवा क्या कमोबेश सभी आयु वर्ग के लोग इस दिन सजने संवरने के लिए महीनों पहले से तैयारियां शुरू कर देते हैं । इस दिन के महात्म का अंदाजा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस बुजुर्ग दंपत्ति की बातचीत से लगाया जा सकता है । बस में सफर करते हुए सभी लोगों को वैलेंटाइन्स डे पर बहस करते हुए सुनकर महिला ने अधेड़ पति से पूछा आज के है? हमारे में जे करवा चौथ होवे वही ये लोग वेलेंटाइन बोले से ।खैर इस दिन की प्रासंगिकता की बहस में मै नहीं पड़ना चाहता आप लोग खुद बुद्धिमान हैं । इस पर साल दर साल पहले से ही बहुत बहस हो चुकी है । मैं तो केवल प्रैक्टिकल चीजें ही मानता हूं । पिछले साल कुछ चर्चित युगल इस दिन जीने मरने की कसमें खा रहे थे तो आज के दिन वे तलाक या मनमुटाव से अलग अलग रह रहें हैं । खैर मै मूल बिषय से भटकना नहीं चाह रहा हूं ।बात हो रही थी फैशन की । किसी भी दुकान पर जाओ तो एक पट्टी पर सूत्रवाक्य लिखा मिल जाएगा कि फैशन के इस दौर में गारंटी की इच्छा न करें । मन कुढ़ जाता है । साला फैशन करने वालों के लिए कोई गारंटी ही नही । हमारे बाबाजी की सोच फैशन के बारे में यूनीक थी । हम लोगों से वो कहा करते थे जानते हो फैशन कैसे बदलता है । जब आप टेलर के यहां सिलने के लिए कपड़े देने जाते हैं अगर कपड़ा अच्छी गुणवत्ता वाला होता है तो सिलते समय कुछ कपड़ा अपने जरूरत के लिए टेलर चुरा लेता है । आप जो माप देकर आते है उससे टाइट फिटिंग आती है । जब आप पहनकर बाहर निकलते हैं तो लोगों को अच्छा लगता है और एक नए फैशन का सूत्रपात हो जाता है ।दरअसल फैशन की शुरूआत भी उदारीकरण की देन है । आजकल गांवों में फैशन तेजी से फल फूल रहा है । लोगों की क्रय शक्ति में अमूलचूल इजाफा हुआ है । रिटेलिंग कंपनियां गांवों की तरफ भाग रही हैं । माल्स एवं शापिंग कांम्लेक्स खुल रहे हैं । रामदीन और नन्हकऊ जैसे लोकल बनियों की दुकानें ठप हो रही हैं । लोग शीशे और वातानुकूलित दुकानों में जाना पसंद कर रहें हैं । इनकी तमाम स्कीमें इनमें मदद कर रहीं हैं । ९० के दशक में जब गांवों में फैशन ने जोर पकड़ा तो लिखने वालों ने चार मजेदार लाइने लिखीं । पेश हैं वे चार लाइनें ।
कल्लू सूरत बनवई खातिर पउडर रोज लगावैं ।
कुटी सिल यस मुंह बा लेकिन गाल खूब चिकनावै ।
चाहे घर मा मिलै न भर पेट भोजनवां
फैशनवां जियरा मारे सजनी ।
सूट बूट पतलून और फैशन मा आई टाई
आंख बनी पर सूझत नाही कवन समय ई आई
चशमा राह दिखावै पकड़ कय दूनौ कनवा
फैशनवा जियरा मारै सजनी ।
रंगई बुधई लेहे रेडियो सइकिल चढ़ कय ध्यावै
पान खाय का पइसा नाही लेकिन घड़ी लगावैं ।
बन कय छैल चिकनवां घूयम सांझ भियहनवां
फैशनवां जियरा मारे सजनी


