Friday, February 15, 2008

प्रेम और आर्कमिडीज का सिद्धांत


वैलेन्टाइंस डे की खुमारी आज भी सब पर तारी है । जैसे कोई बड़े प्रोजेक्ट को इन लोगों द्वारा सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया गया हो । खैर बहुत चिंतन मनन के उपरांत मैने सोचा प्रेम को किसी थ्योरी से जोड़ा जाए । प्रेम क्यों होता है ये जगजाहिर हो चुका है । देह के अंदर होने वाले रसायनिक स्रावों के फलस्वरूप हमारा दिल और दिमाग विपरीत लिंगी के प्रति आकर्षित होता है । अब जब आकर्षित हो ही गया है तो इस संबंधों को स्थायित्व कैसे मिले सोचने की बात ये है । कामदेव के नुकीले तीर से घायल प्रेमी-प्रेमिका के बाद के समय को अगर आर्कमिडीज के सिद्धांत से जोड़े तो मजेदार तथ्य सामने आ रहे हैं ।सबसे पहले आर्कमिडीज का सिद्धांत समझना होगा । इस सिद्धांत के अनुसार जब कोई वस्तु किसी द्रव में पूर्ण या आंशिक रूप से डुबाई जाती है तो वस्तु जितना द्रव हटाती है नीचे से ऊपर की ओर वस्तु पर उतना ही बल लगता है । अगर वस्तु ज्यादा मात्रा में द्रव नहीं हटा पाती तो डूब जाती है । यही कारण है कि बड़ी जहाज तैरती है जबकि एक छोटी गोली पानी में डूब जाती है।अब इसको अगर प्रेम के सापेछ देखें तो अगर प्रेमी या प्रेमिका के व्यकित्व (नाम,पैसा,शोहरत,व्यकित्व आदि को मिलाकर) में ज्यादा अंतर है छोटे व्यकित्व वाला(चाहे वो प्रेमी हो या प्रेमिका)बड़े व्यकित्व वाले के प्रेम में डूब जाएगा । अब इसे चाहे असुरछा की भावना समझें या कुछ और समझने के लिए आप लोग स्वतंत्र है । तो दोनो के बीच प्रेम दिनों दिन प्रगाढ़ होता जाएगा । अपवाद तो हर जगह होते हैं लेकिन ऐसा मेरा मानना है । और यही अगर दोनों का व्यकित्व कमोबेश बराबर है तो एक दूसरे के प्यार में कभी नहीं डूब पाएंगे । इतिहास उदाहरणों से अटा पड़ा है । हो सकता है कि मैं गलत हूं आप लोगों की राय क्या है जरूर अवगत कराएं ।

3 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari said...

आप और गलत?? कैसी बात करते हैं :)

Mired Mirage said...

किसी वैग्यानिक से पूछना पड़ेगा ।
घुघूती बासूती

राजीव जैन Rajeev Jain said...

बहुत खूब लिखा
प्‍यार का सिद़ंधात